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08 February 2023

शिवराज का तंज, पूरी कांग्रेस होल्ड पर है

 भोपाल। कांग्रेस ने दो जिलाध्यक्षों का निर्णय क्या होल्ड किया, प्रदेश की सियासत गर्मा गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसते हुए कहा कि इन दिनों पूरी कांग्रेस ही होल्ड पर चल रही है। नियुक्ति करते हैं और होल्ड कर देते हैं। जनता भी कांग्रेस
को होल्ड पर ही रखने वाली है।

उधर, पार्टी के फैसले पर कमलनाथ ने उमरिया में कहा, लोगों ने दिल्ली में शिकायतें की हैं। लोग नाखुश थे, तो कहा जांच करा लेते हैं, इसलिए होल्ड कर दिए।

कमलनाथ खिसियानी बिल्ली की तरह बात कर रहे

सीएम शिवराज ने कमलनाथ से सवाल करते हुए पूछा- कमलनाथ केवल खिसियानी बिल्ली की तरह इधर-उधर की बात कर रहे हैं। कमलनाथ और कांग्रेस झूठ बोलने में माहिर है। झूठे वचनपत्र पर ही उन्होंने पिछली बार वोट मांगे थे और कोई वचन पूरा नहीं किया। आज फिर उनके वचनपत्र का एक वादा, अब उनके साथ ही जनता को याद दिला रहा हूं। 200 से लेकर 500 हेक्टेयर विशेष कृषि क्षेत्र विकसित किए जाने के साथ एक ही स्थान पर कृषि उपकरण, सिंचाई, बिजली, बीज उपचार, मिट्टी परीक्षण, ग्रेडिंग भंडारण की सुविधा देने और इन क्षेत्रों को मंडी कर से मुक्त करने का वादा कमलनाथ और कांग्रेस ने किया था। अब जनता पूछ रही है, वादा पूरा क्यों नहीं किया? झूठे वादे करना और भूल जाना और जनता को भ्रमित करना, यह कांग्रेस का काम रहा है।

प्रदेश का हाल बेहाल

उमरिया के दौरे पर पहुंचे कमलनाथ ने मीडिया से चर्चा में कहा- उमरिया की वन और कोयले से पहचान है। आज कोयले के क्षेत्र में जहां विभिन्न प्रदेशों से लोग रोजगार के लिए आते थे, आज उमरिया के लोगों को पलायन करना पड़ रहा है। वनभूमि में से चार लाख पट्‌टे निरस्त कर दिए गए। ये उमरिया का हाल है। आज किसान का सत्यानाश, नौजवानों, निवेश, व्यापारियों, कानून-व्यवस्था, गोवंश का सत्यानाश हो गया है। ये आज प्रदेश की स्थिति है और बीजेपी विकास यात्रा निकाल रही है। वे 18 साल का हिसाब दें, मैं 15 महीनों का हिसाब देने को तैयार हूं। मुझसे 15 महीनों का हिसाब मांगते हैं, जनता मेरी गवाह है। 15 महीने में से ढाई महीना आचार संहिता और चुनाव में गया। एक महीना उथल-पुथल में गया। मैं कुर्सी के लिए सौदा नहीं करना चाहता था। मप्र की पहचान सौदे की राजनीति से नहीं करवाना चाहता था। शिवराज सिंह जो नाटक-नौटंकी कर रहे हैं, ये विकास यात्रा नहीं ये उनकी निकास यात्रा है। मप्र में जो भोले-भाले मतदाता हैं, वे समझदार हैं, उन्हें ज्ञान देने की जरूरत नहीं हैं।


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