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13 January 2023

केवल भारत माता की जय बोलने से देश भक्ति नहीं होती-होसबोले

 सुलतानपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने आज यहां देश व समाज को मकर संक्रान्ति पर सामाजिक समरसता कायम करने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि भारत के अमृत काल में मन, समाज, राष्ट्र की कमजोरी दुर्बलता को दूर करना पडे़गा। विश्व के सामने एक श्रेष्ठ समाज के नाते खडे़ होने का सौभाग्य प्राप्त होगा। हम अपने जीवन काल में यह दिखा सकते हैं। भारत के अन्दर यह क्षमता है, भारत करवट ले रहा है। भारत के उत्थान अब प्रारम्भ हो गया है इसीलिए हमें अंधकार को दूर कर प्रकाश को ले जाकर जहां-जहां अधकार हैं, वहां रोशनी पहुंचना पडे़गा। चलो जलाये दीप वहां जहां अभी भी अंधेरा हैं, भारत के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है।

अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान आज मंकर संक्रान्ति उत्सव पर स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए दत्तात्रेय ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के नव संक्रान्ति के जिस महाभियान को लेकर चला है, उसमें देश के नवजवान, अपनी दीक्षा, सबकी रक्षा, समानता के समरसता के इस मंत्र को अपने जीवन में उतारे और नव संक्रमण का काल इस धरती पर उतारने के प्रयत्न सामूहिक प्रयास, संकल्प, भाईचारे, प्रमाणिक पुरूषार्थ से करके दिखायें।उन्होंने कहा कि यदि श्रीकृष्ण की महानता, श्रीराम की श्रेष्ठता का अपने जीवन में स्थान नहीं हैं। हमारे जीवन के आचरण, व्यवहार, परिवेष, घरों, परिसर, परिवेश में उतारना नहीं है तो केवल रामजी की श्रेष्ठता बताने से कुछ नहीं होगा। रामजी के नाम से नहीं रामजी के काम से मनुष्य ऊपर उठता है। हां इतना जरूर हैं कि राम जी के काम करते हुए रामजी का नाम लेना पड़ता हैं। जैसे भारत माता की जय बोलने से देश भक्ति नहीं होती। भारत माता के जयकार के लिए जीवन में प्रामाणिता से निस्वार्थ, बुद्धि, प्रयत्न और परिश्रम से करेगा तभी भारत माता की जय बोलने के लिए नैतिक अधिकार मिलता हैं।
हमने सहा है अपमान
उन्होंने कहा कि हमने एक हजार वर्ष के संघर्ष से कई प्रकार के अनुभव खोयेे, अपमान सहन किये, दमन चक्र चला, गुलाम बनकर रहें। हमारे पूर्वजों ने कितने प्रकार के कष्ट को सहन किया, त्याग और बलिदान करके इस देश को स्वतंत्र बनाने के लिए उन्होंने प्रयत्न किया। उनका भारत के बारे में क्या सपना था? उस सपने को हम समझे, उसको साकार करने के लिए आवश्यक प्रयत्न जीवन में करके दिखाये। भारत के अन्दर बुद्धि, प्रतिभा की कमी नहीं है। दुनिया के सामने हमारा आई क्यू कम नहीं हैं। अपने लोगों में उत्साह भरने व चेतना जागृत करने के लिए हमारे देश के महापुरूषों की मालिका (माला) दुनिया के किसी भी देश की सभ्यता से कम नहीं बल्कि सौ गुना अधिक है। देश के नवजवान के पास चयनित क्षेत्र में दुनिया के किसी भी देश के सामने आगे बढ़ने के लिए आवश्यक बराबरी से अधिक क्षमता है।


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