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16 September 2023

एक निजी सर्वे के मुताबिक... मप्र भाजपा के पाले में 130 से 140 सीटों का अनुमान

 सीएम के तौर पर शिवराज अभी भी पहली पसंद

लाडली बहना योजना से भाजपा का पलड़ा भारी




मध्यप्रदेश में लाडली बहना योजना बीजेपी के लिए गेमचेंजर साबित होती नजर आ रही है। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी भी सबसे भरोसेमंद चेहरा बने हुए हैं। मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए एक निजी सर्वे के मुताबिक राज्य की 62.6 फीसदी जनता पीएम मोदी के काम से मध्यप्रदेश में खुश है। वहीं 25 फीसदी से ज्यादा लोग इसे संतोषजनक बता रहे हैं। 

राहुल गांधी के भाषण से 60 फीसदी लोग नाराज

मई-जून 2023 में हुए इस सर्वे के मुताबिक अगर आज राज्य में चुनाव होते हैं तो बीजेपी को 130 से 140 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं कांग्रेस 66 से 81 सीटों में सिमट जाएगी। राहुल गांधी से राज्य की जनता नाराज है। सर्वे बताता है कि राहुल गांधी के अमेरिका में प्रेस की आजादी वाले भाषण से 60 फीसदी लोग नाराज हैं। 

महिला हित वाली योजनाओं से बीजेपी का पलड़ा भारी
 
सर्वे में लोगों ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद के लिए  पहली पसंद बताया है। सर्वे में लोगों द्वारा जाहिर की गई राय के मुताबिक यह भी सामने आया है कि लाड़ली बहना योजना भारतीय जनता पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित होती जा रही है। लोगों का मानना है कि बीजेपी हमेशा से ही महिलाओं के हित वाली योजनाओं के लिए काम करती रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना के जरिए बीजेपी महिला वोटरों को साधने में कामयाब होती दिख रही है। 
महिलाएं भी इस योजना को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभाओं में उन्हें धन्यवाद करने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं। सभी पंजीकृत लाडली बहनाएं वोटर भी हैं। यह संख्या एमपी में कुल वोटरों की संख्या की 25 फीसदी के करीब है। यही वजह है कि कई जानकार मानते हैं कि महिला मतदाताओं का एकमुश्त समर्थन शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में भाजपा को 150 सीटें तक दिलवा सकता है।




चुनावी वादों पर जनता को नहीं है भरोसा

हालांकि कांग्रेस ने भी इसी तरह की योजना का ऐलान किया है लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि जनता जमीन पर मिले लाभ और चेहरे पर भरोसा करती है, चुनाव के वक्त किए गए कागजी वादों पर नहीं। जानकारों का मानना है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान वो चेहरा बन चुके हैं, जिस पर जनता खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और महिला वर्ग को बेहद भरोसा है। 
दूसरी तरफ कमलनाथ का सीधे जनता से कोई जुड़ाव नहीं है। उनकी छवि अभी भी राजनेता से ज्यादा एक उद्योगपति की है। कांग्रेस की नारी सम्मान योजना अभी कागजों पर है जबकि शिवराज ने लाडली बहना को जमीन पर उतारकर दिखाया है।

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